निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर उत्तर दीजिए-
हम सपरिवार रेलगाड़ी से मामाजी के घर जा पहुँचे। मामीजी हमें देखकर बहुत खुश हुईं और हम उन सबसे मिलकर। सुबह होते ही हम एक अलग, सपनों की दुनिया में पहुँच गए। वह दुनिया थी-अजंता की गुफाओं की दुनिया, क्योंकि अजंता की गुफाओं में दीवारों, छतों पर सुंदर चित्र बने हुए थे। जिस तरह की दुनिया हम आजकल देखते हैं-वहाँ के शहर, कस्बों की इमारतों की दीवारें आमतौर पर सपाट और कोरी होती हैं। फिर वह चाहे घर हो, ऑफिस या कोई अन्य जगह। शहरों में तो ज़्यादा-से-ज्यादा कोई चित्र टाँग दिया जाता है। घर में भी अगर बच्चे पेंसिल या रंगों से दीवार पर अपनी कलाकारी दिखाएँ तो उन्हें अकसर डाँट पड़ जाती है। एक बार रोहित को डाँट पड़ चुकी लेकिन अजंता की गुफाओं की दीवारों, छतों को देखकर ऐसा लगता है कि लोगों को कोरी दीवारें बिलकुल पसंद नहीं थीं। तब लोग अत्यधिक प्रकृति-प्रेमी थे।
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